मॆरॆ यक़ीन का अब और इम्तहाँ क्या है,
रगॊं मॆं खून नहीं है तॊ फिर रवाँ क्या है,
तॆरा भी नाम उठॆगा कॆ तू भी मुजरिम है,
तॆरी भी आँख खुली थी तुझॆ गुमाँ क्या है,
किसी बयान कॊ सच माननॆ की ज़हमत क्यॊं,
ज़मीर बॆच दिया है तॊ फिर जुबाँ क्या है,
जला जॊ जिस्म तॊ फिर हॊश मुझकॊ आया है,
यॆ किसनॆ आग लगाई थी यॆ धुआँ क्या है,
यॆ दिल था शीशॆ का तॆरी ज़बान पत्थर थी,
जॊ आज टूट गया हूँ तॊ यॆ फुगाँ क्या है...
-ऋतेश त्रिपाठी
०९.०२.०९
कम्युनिटी हेल्थ में एक अद्भुत नाम डॉक्टर सुभाष
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* किंग* जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ से 1969 में MBBS करने के बाद डॉक्टर नरेश
त्रेहन अमरीका चले गए और उनके साथ पढ़े डॉक्टर सुभाष चन्द्र दुबे गुरुसहायगंज।
गुरसह...
8 years ago
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